मुंबई APMC के ‘ड्रायफ्रूट्स किंग’ दीपक काकड़िया पर शिकंजा, मसाला मार्केट की दुकान से गिरफ्तारी, आज पनवेल कोर्ट में पेशी
ड्रायफ्रूट्स के कम दाम वाले बिल, कंपनियों का नेटवर्क और करोड़ों का लेन-देन कस्टम CIU की बड़ी कार्रवाई
अखरोट से शुरू हुई जांच अब दूसरे ड्रायफ्रूट्स तक! कस्टम ड्यूटी चोरी के आरोपों में APMC कारोबारी पर शिकंजा
मजदूरों के नाम पर कंपनियां बनाने, अंडर-इनवॉइसिंग और करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन की जांच GST चोरी और अन्य ड्रायफ्रूट्स के आयात में भी गड़बड़ी की आशंका, कई व्यापारी CIU के रडार पर
एपीएमसी न्यूज़ नेटवर्क/ नवी मुंबई: मुंबई APMC के मसाला मार्केट में ड्रायफ्रूट्स कारोबार से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के कस्टम ड्यूटी घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कस्टम विभाग की केंद्रीय खुफिया इकाई (CIU) को दीपक काकड़िया की पिछले कई दिनों से तलाश थी। आखिरकार, गुरुवार रात उन्हें मुंबई APMC की मसाला मार्केट स्थित उनकी दुकान से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। चिली से अखरोट आयात कर उनकी कीमत कम दिखाने, दुबई की कंपनियों के बिलों के जरिए कथित अंडर-इनवॉइसिंग और करोड़ों रुपये की कस्टम ड्यूटी चोरी के आरोपों के बीच इस कार्रवाई को अहम माना जा रहा है। अब जांच का दायरा केवल अखरोट तक सीमित नहीं, बल्कि अन्य ड्रायफ्रूट्स के आयात, अलग-अलग कंपनियों के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन और संभावित GST अनियमितताओं तक पहुंचने की आशंका है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, काकड़िया को आज पनवेल कोर्ट में पेश किया जाएगा ऐसी खबर सामने आई है। इस कार्रवाई से APMC ड्रायफ्रूट्स कारोबार में कथित कस्टम चोरी के नेटवर्क को लेकर हलचल तेज हो गई है।
जांच का दायरा केवल अखरोट के आयात तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। आरोप है कि अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से आयात किए गए ड्रायफ्रूट्स की वास्तविक कीमत से कम मूल्य के बिल दिखाकर सीमा शुल्क बचाने का खेल चलाया गया। साथ ही GST में कथित अनियमितताओं, कंपनियों के बीच वित्तीय लेन-देन और कारोबार से अर्जित संपत्तियों की भी जांच की जरूरत सामने आ रही है। MIDC में कोल्ड स्टोरेज और APMC मसाला मार्केट में खरीदी गई दुकानों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन संपत्तियों का कथित अपराध से संबंध आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट होगा।
चिली से अखरोट, दुबई के बिल और ₹44 करोड़ की कथित कस्टम चोरी
इस पूरे मामले में चिली से छिलके सहित अखरोट के आयात और उनकी कीमत कम दर्शाने के आरोप प्रमुख हैं। जांच से संबंधित उपलब्ध विवरणों के अनुसार, अखरोट की वास्तविक कीमत करीब 2.70 डॉलर प्रति किलो होने के बावजूद कथित तौर पर दुबई की मध्यस्थ कंपनी के जरिए बिलों में कीमत घटाकर 1.50 डॉलर प्रति किलो दिखाई गई।
आरोप है कि इस तरह आयातित माल का मूल्य कम घोषित कर सीमा शुल्क की देनदारी घटाई गई। करीब 3,630 मीट्रिक टन अखरोट के आयात से जुड़े इस मामले में लगभग ₹44 करोड़ की कस्टम ड्यूटी चोरी का आरोप सामने आया है। जांच एजेंसियों के लिए अब आयात बिलों, भुगतान के वास्तविक रास्तों, विदेशी मध्यस्थ कंपनियों और भारतीय आयातकों के बीच संबंधों की पड़ताल अहम होगी।
मजदूरों के नाम पर कंपनियां, करोड़ों का कारोबार किसके नियंत्रण में?
कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली को लेकर सबसे गंभीर सवाल अलग-अलग कंपनियों के गठन और उनके वास्तविक संचालकों पर उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ कंपनियां दूसरे व्यक्तियों के नाम पर बनाई गईं और उनके जरिए आयात कारोबार तथा वित्तीय लेन-देन किए गए। इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर वास्तविक कारोबारियों की भूमिका छिपाने या सीमा शुल्क की देनदारी कम करने के लिए हुआ या नहीं, इसकी जांच महत्वपूर्ण है।
कस्टम विभाग के हलफनामे में दीपक ट्रेडिंग कंपनी, आकाश एंटरप्राइजेज, एबीसी एंटरप्राइज, बेस्ट डील ट्रेडर्स और स्वस्तिक इंटरनेशनल के बीच करोड़ों रुपये के लेन-देन का उल्लेख बताया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, दीपक ट्रेडिंग कंपनी से आकाश एंटरप्राइजेज को करीब ₹5.44 करोड़ और वहां से स्वस्तिक इंटरनेशनल को लगभग ₹4.20 करोड़ हस्तांतरित किए जाने की जानकारी है।
इन लेन-देन से कंपनियों के बीच कारोबारी संबंधों की पड़ताल का रास्ता खुलता है। हालांकि, केवल धन हस्तांतरण के आधार पर किसी कंपनी या व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं होती। वास्तविक लाभार्थियों, भुगतान के उद्देश्य और आयातित माल के कारोबार से इन रकमों के संबंध की पुष्टि जांच में होनी बाकी है।
अफगानिस्तान का मूल देश बताकर शुल्क रियायत लेने का आरोप
अखरोट आयात से जुड़े एक अन्य मामले में संयुक्त अरब अमीरात के जेबेल अली सहित अन्य बंदरगाहों से न्हावा शेवा पहुंचे अखरोट और किशमिश का मूल देश अफगानिस्तान दर्शाए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित गलत घोषणा के जरिए दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौते (SAFTA) के तहत सीमा शुल्क में रियायत का लाभ लिया गया।
इस अलग मामले में करीब ₹41 करोड़ की कथित कस्टम ड्यूटी चोरी का आंकड़ा सामने आया है। चिली से अखरोट के कम मूल्य वाले बिल और अफगानिस्तान के मूल देश से जुड़ी कथित गलत घोषणा दोनों मामलों की कंपनियों, खेपों और वित्तीय लेन-देन के बीच संबंधों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
पहिले हो चुकी है बेटे की गिरफ्तारी!
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करोड़ो रुपए की कथित कस्टम ड्यूटी चोरी से जुड़े मामले में दीपक काकड़िया के बेटे स्नेह दीपकभाई काकड़िया को DRI ने सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। आरोप है कि वह अपने पिता के साथ दीपक ट्रेडिंग कंपनी और एंजेल एंटरप्राइज जैसी कंपनियों से जुड़े कारोबार में शामिल थे।
वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट के 8 सितंबर 2026 के आदेश में दीपकभाई काकड़िया और ब्रिजेश दीपकभाई उर्फ विनोदभाई काकड़िया की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने का उल्लेख है। अदालत ने उपलब्ध प्रथमदृष्टया सामग्री और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता पर विचार किया था।
GST चोरी की आशंका, कोल्ड स्टोरेज और दुकानों की खरीद भी जांच के घेरे में?
कस्टम ड्यूटी के कथित घोटाले के साथ अब GST से संबंधित संभावित अनियमितताओं की भी जांच की मांग उठ रही है। सवाल यह है कि आयात के समय घोषित माल की कीमत, वास्तविक बिक्री मूल्य, कारोबार की पुस्तकों, GST रिटर्न और कंपनियों के बैंक खातों में दर्ज रकम के बीच कोई अंतर था या नहीं।
इसी तरह MIDC क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज और APMC मसाला मार्केट में दुकानों की खरीद को लेकर भी संपत्ति के स्रोत और कारोबार से अर्जित रकम के संभावित संबंधों की जांच अहम हो सकती है। फिलहाल इन संपत्तियों को अवैध कमाई से खरीदा गया मानने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक रूप से सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
₹138 करोड़ से अधिक के कथित घोटाले की चर्चा अन्य व्यापारी भी रडार पर?
कुछ उपलब्ध विवरणों में कस्टम विभाग की केंद्रीय खुफिया इकाई (CIU) की जांच से जुड़े नेटवर्क में पांच लोगों के हिरासत में लिए जाने और ₹138.84 करोड़ से अधिक के कथित कस्टम फ्रॉड का दावा किया गया है। इस आंकड़े में किन मामलों, कंपनियों और आयात खेपों को शामिल किया गया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
APMC के ड्रायफ्रूट्स कारोबार में अन्य आयातकों की भूमिका, कंपनियों के बीच संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और आयात मूल्यांकन की भी जांच हो सकती है। लेकिन अन्य व्यापारियों को जांच के दायरे में होने या दोषी होने की पुष्टि संबंधित एजेंसियों के आधिकारिक बयान और दस्तावेजों से ही की जानी चाहिए।
अब जांच के सामने पांच बड़े सवाल
* क्या चिली से अखरोट आयात में वास्तविक कीमत से कम बिल दिखाकर सीमा शुल्क बचाया गया?
* क्या अलग-अलग कंपनियों के जरिए आयात, भुगतान और वास्तविक कारोबारियों की भूमिका छिपाई गई?
* क्या कथित कस्टम ड्यूटी चोरी के साथ GST में भी अनियमितताएं हुईं?
* क्या कोल्ड स्टोरेज और दुकानों जैसी संपत्तियों की खरीद के धन-स्रोत की जांच होगी?
* क्या इस नेटवर्क में अन्य आयातकों और कंपनियों की भूमिका सामने आएगी?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुंबई APMC के ड्रायफ्रूट्स कारोबार में कथित कम मूल्य के बिलों और कंपनियों के नेटवर्क के जरिए सीमा शुल्क बचाने का खेल कितना व्यापक था। दीपक काकड़िया की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण वित्तीय लेन-देन, आयात दस्तावेजों, GST रिकॉर्ड और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान पर केंद्रित हो सकता है। जांच एजेंसियों के आधिकारिक निष्कर्ष ही इस कथित नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।