ईरान-इज़राइल युद्ध का असर: JNPT पोर्ट पर हजारों कंटेनर फंसे, किसानों-निर्यातकों की बढ़ी चिंता
एपीएमसी न्यूज़ नेटवर्क:
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार पर दिखाई देने लगा है। इस युद्ध जैसी स्थिति से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर भारत के निर्यात कारोबार पर पड़ा है। नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) पर बड़ी संख्या में निर्यात कंटेनर फंस गए हैं, जिससे निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, वर्तमान में जेएनपीटी पर 1,000 से अधिक निर्यात कंटेनर अटके हुए हैं। इन कंटेनरों में अंगूर, प्याज, पपीता, अनार, तरबूज सहित कई कृषि उत्पाद भरे हुए हैं। इनमें से 150 कंटेनर नासिक से भेजे गए प्याज के हैं, जिनमें प्रत्येक कंटेनर में लगभग 29 से 30 टन प्याज लदा हुआ है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 5,400 टन प्याज बंदरगाह पर फंसा हुआ है।
ये सभी खेप मुख्य रूप से खाड़ी देशों के लिए भेजी गई थीं और अधिकतर माल दुबई के रास्ते आगे भेजा जाना था। लेकिन मध्य-पूर्व में युद्ध जैसे हालातों के कारण दुबई का बाजार फिलहाल अस्थायी रूप से बंद होने की खबर है। इतना ही नहीं, जो 370 भारतीय कंटेनर पहले ही दुबई पहुंच चुके थे, वे भी वहां फंसे हुए बताए जा रहे हैं। दुबई का यह मार्ग यूरोप के कुछ देशों को निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण है, इसलिए इस संकट से वैश्विक सप्लाई चेन पर भी असर पड़ रहा है।
सबसे बड़ी चिंता नाशवान कृषि उत्पादों के निर्यातकों को लेकर है। यदि समय पर इनका उपयोग या निर्यात नहीं हुआ तो फल-सब्जियां खराब होने का खतरा है। बंदरगाह पर खड़े रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों को बिजली से जोड़े रखने पर प्रति कंटेनर रोज़ करीब 8,000 रुपये का खर्च आ रहा है। वहीं यदि स्थिति ज्यादा लंबी चली तो माल को कंटेनर से उतारने पर 5,000 से 6,000 रुपये प्रति कंटेनर अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ सकता है।
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो निर्यातकों को अपना माल वापस मंगाने की नौबत आ सकती है। इस निर्यात ठहराव का असर अब घरेलू बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। निर्यात रुकने से स्थानीय बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे प्याज और अन्य कृषि उत्पादों के दाम गिरने की आशंका है।
किसान इसे “दोहरी मार” बता रहे हैं—एक ओर उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है और दूसरी ओर निर्यात में अनिश्चितता से बाजार कमजोर हो रहा है।
इधर हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने एपीडा (APEDA) से मांग की है कि बंदरगाह पर खड़े कंटेनरों के अतिरिक्त खर्च का वहन सरकार करे। साथ ही केंद्र सरकार से वैकल्पिक व्यापार मार्ग तलाशने और प्रभावित किसानों व निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने की मांग भी की गई है।