Wheat Market Outlook: गेहूं में बड़ी मंदी या सिर्फ करेक्शन? जानिए बाजार में गिरावट की पूरी वजह
एपीएमसी न्यूज नेटवर्क: आटा मिलों और प्रोसेसरों की कमजोर मांग के चलते गेहूं के भाव पर दबाव बना हुआ है. सोमवार को प्रमुख बाजारों में गेहूं के हाजिर भाव में 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई. पूर्वी भारत के बाजारों में गिरावट अपेक्षाकृत ज्यादा रही, जहां निर्यातकों की खरीद कमजोर पड़ने से भाव करीब 40 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे आए हैं.
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में गेहूं के भाव में कुल 30 से 40 रुपये प्रति क्विंटल की कमजोरी आई है. बाजार जानकारों के मुताबिक, इसका मुख्य कारण बढ़ती आवक नहीं, बल्कि घरेलू मांग में सुस्ती और प्रोसेसिंग मार्जिन पर बढ़ता दबाव है.
आटा, मैदा और सूजी की मांग कमजोर होने से मिलें फिलहाल सिर्फ अपनी तत्काल जरूरत के मुताबिक खरीद कर रही हैं. गेहूं की लागत बढ़ने के बावजूद तैयार उत्पादों के भाव उसी अनुपात में नहीं बढ़ने से मिलों के मार्जिन पर दबाव है.
दूसरी ओर, निर्यात मांग अभी भी बाजार को कुछ सहारा दे रही है. हालांकि पूर्वी भारत में निर्यातकों की खरीदारी कमजोर हुई है. अगर निर्यात मांग और घटती है, तो घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.
गेहूं बाजार में OMSS के तहत सरकारी बिक्री की चर्चा भी सेंटीमेंट को प्रभावित कर रही है. हालांकि फिलहाल वास्तविक सरकारी गेहूं बाजार में नहीं आया है. इसलिए OMSS का असर फिलहाल सप्लाई से ज्यादा मनोवैज्ञानिक माना जा रहा है.
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा गिरावट को लंबी मंदी की शुरुआत के बजाय मांग आधारित समायोजन माना जा रहा है. निकट अवधि में गेहूं के भाव सीमित दायरे में नरम रह सकते हैं. आटा-मैदा की मांग में सुधार, निर्यात खरीद में तेजी या OMSS बिक्री में देरी बाजार को सहारा दे सकती है.