नागपुर APMC को हाईकोर्ट से झटका, राष्ट्रीय महत्व के बाजार का दर्जा बरकरार; मुंबई APMC के सत्ता केंद्रों की रणनीति भी फेल?
मुंबई-नागपुर APMC की राजनीति में बड़ा मोड़, सरकार के ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ पर कोर्ट की पहली मुहर पर्दे के पीछे चली रणनीति भी नहीं आई काम.
“राष्ट्रीय महत्व का दर्जा बरकरार… हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, APMC की राजनीति में नए समीकरण शुरू”
APMC National Market :एपीएमसी न्यूज़ नेटवर्क : एशिया की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी मानी जाने वाली मुंबई कृषि उत्पन्न बाजार समिति (APMC) को राष्ट्रीय महत्व के बाजार का दर्जा मिलने के बाद अब नागपुर APMC को भी वही दर्जा मिल गया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच बाजार परिसर में एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है। चर्चा यह है कि मुंबई APMC का संचालक मंडल पूरे मामले में सार्वजनिक रूप से खामोश रहा, जबकि पर्दे के पीछे नागपुर के जरिए सरकार के फैसले को चुनौती देने का खेल खेला गया। हालांकि हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह रणनीति पूरी तरह विफल होती दिखाई दे रही है। न्यायालय ने सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे राज्य सरकार और पणन विभाग की कार्रवाई को बड़ी कानूनी मजबूती मिली है।
बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्षों से अपात्रता, स्थगन आदेश और न्यायालयीन लड़ाइयों के सहारे सत्ता संरचना को बचाने की कोशिश करने वाले कुछ प्रभावशाली समूहों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि राष्ट्रीय महत्व का बाजार घोषित होने के बाद किसानों, व्यापारियों और बाजार व्यवस्था को वास्तविक लाभ मिलता है या नहीं।
क्या है पूरा मामला?
राज्य सरकार ने 29 व 2 जून 2026 को अधिसूचना जारी कर नागपुर कृषि उत्पन्न बाजार समिति को ‘राष्ट्रीय महत्व का बाजार’ घोषित किया था। इसके विरोध में नागपुर APMC की कार्यकारी समिति के सदस्य अजय गणपत राऊत, अहमदभाई करीमभाई शेख और अन्य ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर तत्काल रोक लगाई जाए, क्योंकि यह महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत आवश्यक नियम बनाए बिना जारी की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने क्या तर्क दिया?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ए.एम. घारे ने अदालत को बताया कि अधिसूचना लागू होने से मौजूदा बाजार समिति का कामकाज प्रभावित होगा और समिति के भंग होने की स्थिति बन सकती है।उन्होंने यह भी आशंका जताई कि 1963 के मूल अधिनियम की धारा 15A के तहत प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है। साथ ही संशोधन अधिनियम 2025 की वैधानिकता को पहले से चुनौती दिए जाने का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया।
सरकार ने क्या जवाब दिया?
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील एन.एस. राव ने अदालत में अधिसूचना का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए पूरी वैधानिक प्रक्रिया का पालन कर यह अधिसूचना जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय महत्व का बाजार घोषित करने का निर्णय कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक सक्षम, पारदर्शी और व्यापक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति प्रफुल्ल खुबालकर ने अधिसूचना पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को याचिका में संशोधन करने के लिए एक सप्ताह का समय तो दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि संशोधन अधिनियम 2025 की धारा 5-1A, 5-1B और 5-1C वर्तमान में लागू कानून का हिस्सा हैं और सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर अधिसूचना जारी की है।
मुंबई और नागपुर APMC पर क्यों उठ रहे सवाल?
मुंबई और नागपुर APMC लंबे समय से विभिन्न भ्रष्टाचार,प्रशासनिक, वित्तीय और राजनीतिक विवादों के कारण चर्चा में रहे हैं। किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि बाजार समितियों में वास्तविक किसानों की भागीदारी लगातार कम होती गई जबकि दलाल और प्रभावशाली हित समूह व्यवस्था पर हावी होते गए। जानकारों   का कहना है कि बाजार समितियों का मूल उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना था, लेकिन कई स्थानों पर सत्ता संघर्ष और गुटबाजी ने बाजार व्यवस्था को कमजोर किया।जिससे बाज़ार समिति से किसान और प्रमाणिक व्यपारी हद्दपार हो गए .
अब आगे क्या?
राष्ट्रीय महत्व का बाजार घोषित होने के बाद बाजार समितियों की संरचना, प्रशासन और कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध होंगे, जबकि विरोधी पक्ष इसे बाजार समितियों की स्वायत्तता पर प्रभाव डालने वाला कदम बता रहा है।
फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले ने इतना स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की अधिसूचना पर तत्काल कोई रोक नहीं है और राष्ट्रीय महत्व के बाजार का दर्जा बरकरार रहेगा।
हाइलाइट्स
- नागपुर APMC को राष्ट्रीय महत्व के बाजार का दर्जा बरकरार
- हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से किया इनकार
- याचिकाकर्ताओं को नहीं मिली राहत
- राज्य सरकार और पणन विभाग की कार्रवाई को पहली बड़ी कानूनी मजबूती
- बाजार में चर्चा – पर्दे के पीछे चली रणनीति भी नहीं आई काम
- किसानों और व्यापारियों की निगाहें अब राष्ट्रीय बाजार मॉडल के परिणामों पर